स्वाद नहीं, सेहत है जरूरी

  • Devendra
  • 29/10/2020
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अब मिठाई दुकानदारों की भी जिम्मेदारी है कि वह अपनी विश्वसनीयता को कायम रखें। मिलावटी मिठाई बेचकर फजीहत होने के बजाय खासकर मिलावटी मावे से तौबा करें। पिछले 8 महीने से कोरोना से जंग लड़ रही शहर की जनता की सेहत से कतई खिलवाड़ नहीं करें। वहीं जनता की जिम्मेदारी है कि वह मिलावटी मिठाई बेचने वालों से प्रशासन व परिचितों को सावचेत करें।

होली के रंग-बिरंगे गुलाल की खुमारी टूटने के बाद मार्च के आखिरी सप्ताह से दशहरा तक आते आते कोरोना का संक्रमण अब धीरे-धीरे खत्म हो रहा है। कोरोना ने समाज के हर वर्ग के हर उम्र के लोगों को किसी न किसी रूप में प्रभावित किया है। कोरोना के डर और आशंका के बीच अब थोड़ी राहत है लेकिन यह कतई नहीं भूलना चाहिए कि संकट टल गया है। आर्थिक और मानसिक झंझावतों से निकलकर जनता त्यौहार (दशहरा-दीपोत्सव) तक पहुंची है। ऐसे में कोरोना को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही उचित नहीं है। सेहत के प्रति तो कतई नहीं। त्यौहारों पर स्वाद से जरूरी सेहत है।

चंद लोग अतिरिक्त मुनाफे के लिए मिलावटी खाद्य पदार्थों की खरीद फरोख्त करने से परहेज नहीं करते। बिजयनगर जैसे छोटे शहरों में 10 क्विंटल से अधिक मिलावटी मावा पकड़ा जाना अचंभित करने वाली घटना है। इसे कतई हल्के में लेने के बजाय अधिक सावचेत रहने की जरूरत है। यह मिलावटी मावा रंगीन डिब्बों में मिठाई के रूप में हमारे -आपके घर में ही तो आता। परिजनों को भी इसी मिलावटी मावे से बनी मिठाइयों से मुंह मीठा करवाते। जरा सोचिए, दस क्विंटल मिलावटी मावे से कितनी मिठाइयां बनती? इसकी कल्पना मात्र से रोंगटे खड़े हो जाते हैं। ऐसे में शुद्ध के लिए युद्ध अभियान में आम जनता को अपनी सक्रिय सहभागिता निभानी चाहिए।

अव्वल तो यह कि इस बार त्यौहार पर कोशिश करें कि घर पर बने व्यंजन का स्वाद चखें और परिजनों को भी परोसें। या फिर किसी विश्वसनीय मिठाई दुकान से ही मिठाई खरीदें। चूंकि त्यौहारी सीजन के शुरू में ही मिलावटी मावा मिलने से आमजन भी सावचेत हो गए हैं। अब मिठाई दुकानदारों की भी जिम्मेदारी है कि वह अपनी विश्वसनीयता को कायम रखें। मिलावटी मिठाई बेचकर फजीहत होने के बजाय खासकर मिलावटी मावे से तौबा करें। पिछले आठ महीने से कोरोना से जंग लड़ रही शहर की जनता की सेहत से कतई खिलवाड़ नहीं करें। वहीं जनता की जिम्मेदारी है कि वह मिलावटी मिठाई बेचने वालों से परिचितों को सावचेत करें। त्यौहारी सीजन में परिजनों के साथ आनंद तभी आएगा जब आप स्वस्थ हों। जयहिन्द।
दिनेश ढाबरिया

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