जनजाति क्षेत्र के लोगों को अनुभव कराएं कि वे मुख्यधारा से जुड़े हैं-मिश्र

  • Devendra
  • 16/10/2020
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जयपुर। (वार्ता) राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र ने कहा है कि राज्य सरकार स्तर पर जनजातीय क्षेत्र के लोगों को यह अनुभव कराना जरूरी है कि वे मुख्यधारा से जुड़े हुए हैं। श्री मिश्र आज यहां राजभवन में जनजाति कल्याण हेतु संचालित योजनाओं और विकास कार्यों की प्रगति की ऑनलाइन समीक्षा बैठक में सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने नवाचारों के जरिए जनजाती क्षेत्र के लोगों को अधिकाधिक रूप में लाभान्वित किए जाने, उनमें आत्मविश्वास का सृजन किए जाने और जनजाती क्षेत्र के नेताओं के साथ-साथ अन्य समुदाय के लोगों द्वारा भी उनके लिए कार्य किए जाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सामंजस्य, समरसता का भाव रखते हुए सभी मिलकर जनजातीय विकास के लिए कार्य करेंगे तभी उन्हें महसूस होगा कि वे मुख्य धारा से जुड़े हुए हैं।

उन्होंने जनजाति क्षेत्र के 40 गांवो को आदर्श गांव बनाए जाने के उनके सुझाव की भी समीक्षा की तथा कहा कि इस दिशा में और अधिक प्रभवी प्रयास किए जाने की जरूरत है। इसी तरह उन्होंने अनुसूचित क्षेत्र में उत्तर मैट्रिक छात्रवृति के भुगतान को शत-प्रतिशत सुनिश्चित करने, आदिवासी क्षेत्र के विकास के लिए महाराष्ट्र विकास मॉडल का परीक्षण कर उसे लागू किए जाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जनजातीय और गैर जनजातीय क्षेत्र में असमानता कैसे रुके, इसके समाधान के लिए भी प्रभावी प्रयास किये जाने चाहिए। उन्होंने आदिवासी क्षेत्रों के चहुंमुखी विकास के अंतर्गत सामाजिक समरसता का विशेष ध्यान रखते हुए समन्वय रखकर कार्य करने के निर्देश दिए तथा कहा कि इसी से जनजातीय क्षेत्र में विकास के और अधिक अवसर स्थानीय समुदाय को मिल सकेंगे।

श्री मिश्र ने जनजाति क्षेत्र के आठ जिलों में पीएमटी, पीईटी आदि की कोचिंग से लाभान्वित होकर मेडिकल और इंजीनियरिंग क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने वाले युवाओं की सूची बनाने और उनका सम्मेलन करवाने के भी निर्देश दिए ताकि वहां के दूसरे युवाओं को प्रेरणा मिले। श्री मिश्र ने इसी तरह कौशल विकास के अंतर्गत भी क्षेत्र विशेष की आवश्यकतानुसार लाभान्वित लोगों, स्वावलम्बी बने युवाओं की सूची बनाकर उनका सम्मेलन करने पर जोर दिया ताकि आदिवासी क्षेत्र में प्रोत्साहन का वातावरण बन सके।

उन्होंने जनजाति क्षेत्र में कई स्थानों पर विकास कार्यों पर शून्य फीसदी खर्च को गम्भीरता से लेने के निर्देश दिए तथा कहा कि इसके क्या कारण रहे, इसकी सतत मोनिटरिंग की जाए। उन्होंने जनजाति क्षेत्र में बने होस्टलस का जिस प्रयोजन से वे बनाये गए है, उसी प्रयोजन से उनका समुचित उपयोग हो, इसे भी विशेष रूप से देखे जाने और इसकी माॅनिटरिंग किये जाने की अधिकारियों को विशेष रूप से हिदायत दी। उन्होंने कहा कि होस्टल में कहां कितने छात्र हैं, इसे देखे जाने और वहां पर्याप्त सुविधाएं है, इसकी भी प्रभावी माॅनिटरिंग की जाए।

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