सत्य की साधना

खारीतट संदेश के पूरे हुए 5 साल
अवैध कार्यों पर खारीतट संदेश को इत्तला देने वालों को स्पष्ट और विनम्र संदेश यही है कि चीते की चाल, बाजीराव की तलवार और खारीतट संदेश की निष्पक्षता, विश्वसनीयता और निर्भीकता पर कोई संदेह नहीं करते। खारीतट संदेश इन पांच वर्षों में पाठकों के बीच यही विश्वास अर्जित किया है।

पांच साल का सफर तय कर खारीतट संदेश साप्ताहिक का यह अंक आपके हाथों में है। समय को साक्षी मान कर और सत्य की कसौटी पर खारीतट संदेश ने समाचार आप तक पहुंचाया है। इस पांच साल के सफर में कई खट्टे-मीठे अनुभव हुए लेकिन सच पर आंच नहीं आने दिया। इस पांच साल में दिल्ली से लेकर जयपुर, और बिजयनगर से लेकर गुलाबपुरा तक में कई बदलाव भी आए जिसका हर नागरिक पर व्यापक असर पड़ा। चाहे नोटबंदी हो या फिर जीएसटी, जल जमाव की समस्या हो या फिर इस कोरोना काल की, फर्जी पट्टे का मामला हो या फिर सरकारी जमीन पर रसूखदारों की गिद्धदृष्टि की, खारीतट संदेश खबरों के पीछे का सच भी पाठकों तक पहुंचाने में कोई कसर नहीं छोड़ा है। सुधि पाठकों, विज्ञापनदाताओं और हाकरों ने हमेशा खारीतट संदेश के इस जज्बे को सराहा है। यही हमारी अक्षय और अर्जित पूंजी है।

पाठकों का यह आशीर्वाद हमारी कलम को ताकत देता है। इसी ताकत के भरोसे सच को पाठकों के समक्ष लाते भी हैं। समय साक्षी है कि खारीतट संदेश में प्रकाशित समाचार के बाद रसूखदारों की हेंकड़ी शहर की चौराहों से लेकर गलियों तक में चारों खाने चित्त नजर आया। विश्वास रखिए, खारीतट संदेश अपने आखिरी शब्द तक पाठकों के इस भरोसे को कायम रखेगा। इसी कॉलम के दायीं ओर प्रकाशित समाचार को खारीतट संदेश की विश्वसनीयता, निर्भीकता और निष्पक्षता को आंका जा सकता है। खारीतट संदेश ने अच्छे कामों को सराहा भी है तो गैरकानूनी कार्यों को प्रमुखता से प्रकाशित भी किया है।

नियम-कायदों को ताक पर रख कर अवैध निर्माण का मुद्दा हो या फिर कोई और गैरकानूनी कार्य, खारीतट संदेश का प्रहार जारी रहेगा। अवैध कार्यों पर खारीतट संदेश को इत्तला देने वालों को स्पष्ट और विनम्र संदेश यही है कि चीते की चाल, बाजीराव की तलवार और खारीतट संदेश की निष्पक्षता और निर्भीकता पर कोई संदेह नहीं करते। खारीतट संदेश ने 5 साल का सफर तय किया है। पत्रकारिता के लिए यह बहुत छोटी अवधि है। विश्वसनीयता, निष्पक्षता और निर्भीकता से सच को पाठकों तक लाना हमारी जिम्मेदारी पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। पत्रकारिता समाचारों का प्रकाशन ही नहीं, सत्य की साधना भी है। जयहिन्द।
दिनेश ढाबरिया

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