फिर पट्टे में हेरा-फेरी

  • Devendra
  • 06/08/2020
  • Comments Off on फिर पट्टे में हेरा-फेरी

नगर पालिका बिजयनगर: कांग्रेस पार्षद ने लगाए गंभीर आरोप, दिए सबूत
नगर पालिका बिजयनगर में नियम-कायदों को ताक में रख कर जमीन के पट्टे में हेराफेरी का मामला सामने आया है। बोर्ड कांग्रेस का है और कांग्रेस पार्षद ने ही सबूत सहित गंभीर आरोप लगाए हैं। इस ‘कारगुजारी” में नगर पालिका के कर्मचारी-अधिकारी व श्री प्राज्ञ जैन स्मारक समिति के पदाधिकारियों के बीच गहरी सांठ-गांठ से इनकार नहीं किया जा सकता। पढि़ए खारीतट संदेश की यह रिपोर्ट…
बिजयनगर। (देवेन्द्र कुमार) श्री प्राज्ञ महाविद्यालय के पीछे एवं राजदरबार कॉलोनी के रास्ते के बीच विशालकाय जमीन पर प्रस्तावित श्री प्राज्ञ इंटरनेशनल स्कूल के भवन निर्माण की स्वीकृति में नगर पालिका की ओर से गम्भीर अनियमितताएं बरतने और नियम कानून ताक में रखकर कूटरचित दस्तावेजों के बलबूते स्वीकृति देने का मामला प्रकाश में आया है। इस सम्बंध में कांग्रेस के तेज तर्रार पार्षद बृजेश तिवाड़ी ने नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी ललितसिंह देथा को ज्ञापन सौंपा है।

ज्ञापन में मामले की निष्पक्ष एवं गहन जांच कर श्री प्राज्ञ जैन स्मारक समिति को दी गई निर्माण स्वीकृति व पट्टे को निरस्त करने की मांग की गई है। साथ ही ज्ञापन में तत्कालीन अधिशासी अधिकारी कमलेश मीणा, पालिकाध्यक्ष सचिन सांखला, व एक पार्षद एवं पालिकाकर्मी सुनिल जैन पर मामले में संलिप्त होने का आरोप लगाते हुए इनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग भी की गई है। ज्ञापन में बताया है कि जैन संत पन्नालाल जी महाराज ने क्षेत्र के गरीब वर्ग के विद्यार्थियों को ध्यान में रखते हुए श्री प्राज्ञ महाविद्यालय की स्थापना की थी।

महाविद्यालय का संचालन श्री प्राज्ञ जैन स्मारक समिति की ओर से किया जा रहा है। इस महाविद्यालय के पीछे 7 बीघा 19 बिसवा जमीन वर्षों से खाली मैदान के रूप में थी। इसी जमीन पर अब श्री प्राज्ञ जैन स्मारक समिति की ओर से श्री प्राज्ञ इंटरनेशनल स्कूल भवन का निर्माण करवाया जा रहा है।

गौर करने वाली बात यह है कि इस निर्माण कार्य के लिए जो निर्माण स्वीकृति स्मारक समिति ने नगर पालिका से ली है उसमें गम्भीर अनियमितताएं बरती गई है। मसलन पालिका क्षेत्र में खसरा संख्या 340,342,339 व 343 का आधा हिस्सा कृषि से संस्थागत उपयोग के लिए श्री प्राज्ञ जैन स्मारक समिति की ओर से नगर पालिका में आवेदन किया गया था। आवेदन पत्र में भूमि का नाप 7 बीघा 19 बिसवा दिया गया था जो करीब 15 हजार 391 वर्गगज होता है। इसके बावजूद निर्माण स्वीकृति व पट्टे की कार्रवाई के चलते ले-आउट प्लान समिति ने 14 हजार 912 वर्गगज जमीन के लिए ले-आउट प्लान स्वीकृत कर दिया। वहीं पालिका की ओर से समिति को सौंपे गए पट्टे का नाप 14 हजार 696.30 वर्गगज अंकित है। इससे संदेह की स्थिति पैदा हो गई।

तिवाड़ी ने यह भी आरोप लगाया कि स्वायत्त शासन निदेशालय एवं नगर नियोजक अजमेर ने पालिका बिजयनगर को कुछ दिशा-निर्देश दिए थे जिनकी पालना श्री प्राज्ञ जैन स्मारक समिति को करनी थी। इन नियमों का पालन करवाना नगर पालिका प्रशासन के जिम्मे था। उक्त औपचारिकताएं पूर्ण होने के बाद ही निदेशालय एवं नगर नियोजक अजमेर के दिशा-निर्देशानुसार समिति को पट्टा व निर्माण स्वीकृति उच्च शिक्षा के प्रयोजनार्थ दी जानी थी। लेकिन ऐसा नहीं होकर लाख टके का सवाल यह कि स्कूल के लिए स्वीकृति कैसे मिली?
जो पट्टा नगरपालिका ने समिति को जारी किया है उसके अनुसार उत्तरी दिशा में नहर के बाहरी सीमा से 30 फिट जमीन सड़क के लिए छोड़े जाने का निर्देश था। इसके बावजूद मौके पर सड़क के लिए प्रस्तावित जमीन छोड़ी नहीं गई। प्राज्ञ संस्थान के स्वीकृत ले-आउट प्लान में पूर्वी दिशा वाली भूमि पर 60 फिट चौड़ा पहुंच मार्ग व दक्षिण में 40 फिट आम रास्ता दर्शाया गया, लेकिन पट्टा विलेख में नहीं है।

पट्टे के लिए नगर पालिका में पेश किए गए नजरी नक्शा से यह स्पष्ट हो जाता है कि नगर पालिका बिजयनगर के कुछ पदाधिकारी, अधिकारी व कर्मचारी ने मिलीभगत से पद का दुरुपयोग कर नियम विरुद्ध अवैध कार्रवाई कर नगर पालिका की छवि को धूमिल किया है। ले-आउट प्लान में सैटबैक के लिए पूर्व दिशा में 18 मीटर व बाकी की तीनों दिशाओं में 9-9 मीटर का सैटबैक के लिए जगह दर्शाई गई, लेकिन पट्टे में इसका उल्लेख नहीं है। जबकि सैटबैक छोड़ा जाना आवश्यक है। एकल पट्टा प्राप्त करने के लिए नगर पालिका ने नगर नियोजक विभाग अजमेर से उच्च शिक्षा के प्रयोजनार्थ ही निवेदन किया था, फिर उक्त खसरा संख्या पर स्कूल भवन का निर्माण कैसे हो रहा है? जबकि पालिका क्षेत्र के मास्टर प्लान में आवेदित भूमि महाविद्यालय के प्रयोजनार्थ ही है।

मामले में कूटरचित दस्तावेजों के बलबूते नगर पालिका को आर्थिक हानि पहुंचाते हुए स्वायत्त शासन निदेशालय के आदेशों की घोर अवहेलना की गई है। नगर पालिका की निर्माण स्वीकृति में तकनीकीविज्ञ कुशल चंदेला ने भी सांठ-गांठ करते हुए नियम विरुद्ध निर्माण स्वीकृति में भूमिका निभाई है।

मामले में अधिशासी अधिकारी की ओर से 31 मई 2018 को एक राज्य स्तरीय समाचार पत्र में जो आम-सूचना प्रकाशित करवाई गई, उसमें भूखण्ड का नाप, विवरण व प्रयोजन अंकित नहीं किया गया। इससे यह उजागर होता है कि इसमें पद का दुरुपयोग कर तत्कालीन अधिशासी अधिकारी ने पालिका को आर्थिक हानि पहुंचाई और फर्जी व कूटरचित दस्तावेज तैयार कर नक्शे में स्कूल भवन दर्शाया गया। ज्ञापन में इस बात का भी उल्लेख है कि भवन निर्माण अनुज्ञा पत्र में प्रार्थना पत्र, दिनांक व भूखण्ड संख्या के खाली कॉलम छोड़ देने के बावजूद स्वीकृति जारी कर दी गई। मौके पर वर्षा जल संग्रहण के लिए होने वाले निर्माण के सम्बंध में समिति ने नगर पालिका में अमानत राशि व बीएसयूपी शुल्क भी जमा नहीं कराया गया।
इन पर गंभीर आरोप
पार्षद बृजेश तिवाड़ी ने पालिका अध्यक्ष सचिन सांखला, अधिशासी अधिकारी कमलेश मीणा, एक पार्षद व पालिकाकर्मी सुनिल जैन के खिलाफ मामले में संलिप्त होने का आरोप लगाते हुए बताया कि इस मामले से इनका जुड़ा होना भी संदेह पैदा करता है। किसी भी सूरत में उक्त कर्मचारी, अधिकारी इस मामले में दखल के लिए अधिकृत नहीं थे। इस आरोप के संदर्भ में पार्षद तिवाड़ी की दलील है कि पालिकाध्यक्ष सचिन सांखला स्वयं श्री प्राज्ञ जैन स्मारक समिति के सदस्य हैं। पालिकाध्यक्ष सांखला के सगे-संबंधी भी स्कूल व महाविद्यालय समिति में सदस्य हैं। इसके अलावा एक पार्षद के चाचा श्री प्राज्ञ महाविद्यालय संचालन समिति के सचिव हैं। तिवाड़ी का यह भी आरोप है कि नगर पालिका के बाबू सुनिल जैन की पत्नी भी श्री प्राज्ञ पब्लिक स्कूल में यूडीसी के पद पर कार्यरत हैं। ऐसे में उक्त कर्मचारी व जनप्रतिनिधियों का इस मामले में संलिप्त होना नगर पालिका अधिनियम का घोर उल्लंघन है।
ये है नियम
नगर पालिका अधिनियम 2009 के तहत धारा 64 के तहत कोई भी व्यक्ति, जो किसी नगरपालिका के साथ, उसके द्वारा या उसकी ओर से की गई किसी संविदा में या किसी नगरपालिका के साथ, उसके अधीन, उसके द्वारा या उसकी ओर से किसी नियोजन में नगरपालिका अधिकारी या कर्मचारी से भिन्न हैसियत से, स्वयं या अपने भागीदार द्वारा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई हिस्सा या हित रखता हो, समुचित नियमों के अधीन अनुशासनात्मक कार्रवाई का भागी होगा।

इसी अधिनियम की धारा 65 के तहत (1) कोई भी सदस्य, जो किसी नगरपालिका, जिसका कि वह सदस्य है, के साथ, उसके अधीन, उसके द्वारा या उसकी ओर से किसी भी संविदा या नियोजन में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई ऐसा हिस्सा या हित जानबूझकर अर्जित करता है, जो ऐसा हिस्सा या हित नहीं है, जो धारा 24 के अधीन किसी व्यक्ति के लिए तद्द्वारा सदस्यता के लिए निरर्हित हुए बिना रखा जाना अनुज्ञेय है, किसी दण्ड न्यायालय के समक्ष दोषसिद्धि पर ऐसे जुर्माने से जो पांच हजार रुपये तक का हो सकेगा, दायी होगा।

(2) कोई भी नगरपालिका अधिकारी या कर्मचारी जो किसी नगरपालिका, जिसका वह अधिकारी या कर्मचारी है, के साथ उसके अधीन, उसके द्वारा या उसकी ओर से किसी संविदा में या, जहां तक नगरपालिका अधिकारी या कर्मचारी के रूप में उसके स्वयं के नियोजन का सम्बंध है, उसके सिवाय, किसी नियोजन में, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई भी हिस्सा या हित जानबूझकर अर्जित करता है, किसी दण्ड न्यायालय के समक्ष दोषसिद्धि पर ऐसे जुर्माने का दायी होगा, जो पांच हजार रुपये तक का हो सकेगा और उस पर लागू होने वाले नियमों के अनुसार अनुशासनिक कार्रवाई के लिए भी दायी होगा।

श्री प्राज्ञ जैन स्मारक समिति को पट्टा व निर्माण स्वीकृति देते समय नगर नियोजक व स्वायत्त शासन निदेशालय के निर्देशों का पूर्ण पालन किया गया है।

सुनिलकुमार जैन, लिपिक, नगर पालिका, बिजयनगर
भवन अनुज्ञा एवं सकर्म समिति ने पत्रावली की जांच कर ही श्री प्राज्ञ जैन स्मारक समिति को निर्माण स्वीकृति दी। इसमें किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं हुआ।

दिनेश कोठारी, पार्षद व सदस्य-भवन अनुज्ञा एवं सकर्म समिति
नगर पालिका को दस्तावेज भी दिए
श्री प्राज्ञ जैन स्मारक समिति सदस्य व पदाधिकारियों ने नियम सम्मत कार्रवाई के लिए कार्य करने के लिए नगर पालिका को लिखा गया व दस्तावेज दिए गए। फिर भी नियम विरुद्ध निर्माण स्वीकृति व पट्टा अपने स्वयं के हित और नगर पालिका को आर्थिक हानि पहुंचाने के उद्देश्य से कूटरचित दस्तावेजों के सहारे कार्य करने वाले नगर पालिका के जिम्मेदार पदाधिकारी एवं कर्मचारी के खिलाफ मैं कार्रवाई करवाऊंगा।

बृजेश तिवाड़ी, पार्षद, बिजयनगर
आरोप साबित करे
मेरे पास आने वाली सभी पत्रावलियां नियमानुसार तैयार होकर ही आती हैं। इस पत्रावली पर जिसने शिकायत की वो इतने समय कहां थे। रही बात मुझ पर आरोप लगाने की तो आरोप तो किसी पर भी लगा सकते हैं। उसे सही साबित करे तो मानें। मेरी नजर में इस पत्रावली में सभी कार्रवाई नियमानुसार की गई है।

सचिन सांखला, पालिकाध्यक्ष, नगर पालिका बिजयनगर
होगी जांच
पूरी पत्रावली की जांच की जाएगी। साथ ही जेईएन व एईएन से मौका रिपोर्ट भी करवाई जाएगी। जांच में जो भी चीज सामने आएगी उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

ललितसिंह देथा, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका, बिजयनगर
कारगुजारियों की जांच जरूरी
नगर पालिका बिजयनगर की एक और कारगुजारी सामने आई है। सबूत के साथ। चार साल में की गई कारगुजारियों से कहीं ज्यादा गंभीर। इसकी गंभीरता इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि आरोप लगाने वाला कांग्रेस का पार्षद ही है। नगर पालिका क्षेत्र में निर्माण की स्वीकृति दो मंजिल की ली जाती है और बन जाता है बेसमेंट सहित चार-पांच मंजिल। लेकिन नगर पालिका प्रशासन को ‘कानोंकान” खबर तक नहीं लगती। इसी तरह नियम-कायदों-शर्तों की अनदेखी कर महाविद्यालय की जमीन पर ‘स्कूल” की स्वीकृति नगर पालिका के इतिहास में ‘बेमिसाल” है। नियम-कायदों की कसौटी पर ले-आउट भी बोल्ड-आउट है।

जाहिर है, नगर पालिका में बैठे अधिकारी व कर्मचारी और ‘कुनबे” की सांठगांठ से यह पूरा ‘खेल” हो रहा है। कांग्रेस पार्षद बृजेश तिवाड़ी पुख्ता सबूत के साथ जिन-जिन पर आरोप लगाए हैं वह गंभीर ही नहीं चिंता का विषय भी है। बृजेश तिवाड़ी ने अच्छा ही किया कि पूरे मामले की जांच के लिए ज्ञापन की प्रति उपखंड अधिकारी मसूदा, जिला कलक्टर अजमेर, संभागीय आयुक्त अजमेर एवं स्वायत्त शासन विभाग के निदेशक को भी प्रेषित कर दिया। खारीतट संदेश भी शहर के नागरिकों और सुधि पाठकों की ओर से मामले की गंभीरता को देखते हुए निष्पक्ष जांच का पुरजोर समर्थन करता है। कुनबे की कारगुजारियों पर कुठाराघात करने के लिए निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच जरूरी है।

WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com
Skip to toolbar