खेल गतिविधियां शुरू करने का फैसला राज्य खुद लें: रिजिजू

  • Devendra
  • 15/07/2020
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नई दिल्ली। (वार्ता) केंद्रीय खेल मंत्री किरेन रिजिजू ने बुधवार को कहा कि राज्यों को स्वतंत्र रूप से फैसला यह लेना होगा कि वे खेल गतिविधियां और प्रशिक्षण कब शुरू कर सकते हैं।

रिजिजू ने सभी राज्यों और संघ शासित क्षेत्रों के युवा मामलों और खेल विभागों के प्रभारी मंत्रियों और अधिकारियों के साथ दो दिवसीय वीडियो कॉन्फ्रेंस के दूसरे दिन आज राज्यों में खेल गतिविधियों को फिर से शुरू किए जाने की संभावनाओं की समीक्षा करते हुए कहा, “राज्यों को स्वतंत्र रूप से यह फैसला लेना होगा कि वे खेल गतिविधियां और प्रशिक्षण कब शुरू कर सकते हैं। हालांकि मैं सभी राज्यों से 2-3 महीनों के बाद हालात को देखते हुए कुछ खेल गतिविधियां शुरू करने का अनुरोध करूंगा।” खेल मंत्री ने कहा, “हम सीमित रूप से और गैर अनुबंधित खेलों के लिए खेल कार्यक्रम शुरू कर सकते हैं। ऐसे कुछ राज्य हैं, जिन्होंने अपने खेल केन्द्रों को खोल दिया है और कुछ खेल प्रशिक्षण शुरू कर दिए हैं। हालात सुधरने के साथ हमें ऑन-फील्ड खेलों को फिर शुरू करने के प्रयास करने चाहिए।”

दो दिन की कॉन्फ्रेंस में शामिल होने वाले राज्यों/ संघ शासित क्षेत्रों में से कई ने खेल गतिविधियां शुरू कर दी हैं, जबकि अन्य इसकी योजना बना रहे हैं। दिल्ली, सिक्किम, लक्षद्वीप, चंडीगढ़, गोवा पहले ही टेबिल टेनिस, बैडमिंटन, तीरंदाजी, शॉटपुट, भाला फेंक आदि गैर अनुबंधित खेलों से जुड़ी गतिविधियां शुरू कर चुके हैं। नागालैंड फुटबाल और स्वदेशी खेलों में जिला स्तर की प्रतिस्पर्धाएं शुरू करने योजना बना रहा है। झारखंड की सितंबर से खेल शुरू करने की योजना है, वहीं अरुणाचल प्रदेश, बिहार और मिजोरम खेल शुरू करने के लिए एसओपी तैयार कर रहे हैं।

कॉन्फ्रेंस के दौरान रिजिजू ने कोविड-19 के इस दौर में फिट इंडिया मूवमेंट की प्रासंगिकता पर भी बात की क्योंकि वायरस को हराने में स्वस्थ रहना और प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना दो अहम कारक हैं। उन्होंने कहा, “मैं सभी राज्यों से कोविड के दौरान फिट इंडिया गतिविधियों को जारी रखने और फिटनेस से संबंधित गतिविधियों में आम लोगों को जोड़ने का अनुरोध करता हूं। फिट इंडिया स्कूलों के रूप में स्कूलों के नामांकन से विद्यार्थियों के लिए स्वस्थ रहने को जीवन का एक तरीका बनाने में सहायता मिल सकती है।” रिजिजू ने कहा कि फिट इंडिया स्कूल के रूप में स्कूल की पात्रता के लिए कई मानदंड हैं, लेकिन इनमें से दैनिक पाठ्यक्रम में फिटनेस गतिविधियों को शामिल करना एक अनिवार्य कदम है। रोजाना फिटनेस से स्कूल जाने वाले विद्यार्थियों के लिए बड़े स्तर पर अपनी प्रतिरोधकता बढ़ाने में सहायता मिल सकती है।

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