दूदू बनता जा रहा है किसानों का आंदोलन स्थल

  • Devendra
  • 15/09/2019
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जयपुर। (वार्ता) राजस्थान में किसान महापंचायत के नेतृत्व में किसान पिछले कई वर्षों से कृषि उपज का सही मूल्य एवं अपने हक पाने के लिए संघर्ष कर रहे है और इसके लिए जयपुर जिले का दूदू उनका आंदोलन स्थल बनता जा रहा है जहां से किसान अपनी मांगों को लेकर आगामी नौ अक्टूबर को जयपुर तक पैदल कूच करेंगे।

किसानों ने दूदू में संघर्ष की नींव वर्ष 21 अक्टूबर 2010 में राज्य स्तरीय किसान महापंचायत में रखी और इसके बाद किसानों का दूदू से दिल्ली कूच सहित कई आंदोलनों की शुरुआत दूदू से हो चुकी है और अब किसानों का नौ अक्टूबर से दूदू से जयपुर पैदल कूच भी दूदू से शुरु किया जायेगा। इसके लिए महापंचायत राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने आज दूदू में किसानों को जागरुक करने के लिए जागरण एवं जनसंपर्क अभियान की शुरुआत की। श्री जाट ने बताया कि किसानों को उनकी कृषि उपज की न्यूनतम समर्थन मूल्य के नीलामी बोली आरंभ करने, प्रत्येक ग्राम सहकारी समिति (जीएसएस) पर वर्ष भर खरीद केन्द्र खोलने तथा प्राकृतिक आपदाओं में जितनी मात्रा में फसल खराब हुई है उतनी मात्रा में बीमा राशि का भुगतान करने की मांग को लेकर किसानों का पैदल कूच दूदू से नौ अक्टूबर को शुरु होगा। इसमें अधिक से अधिक किसानों के भाग लेकर इसे सफल बनाने के लिए रविवार को दूदू में किसानों की बैठक हुई और जनजागरण अभियान शुरु किया गया।

उन्होंने बताया कि वह एवं महापंचायत के कार्यकर्ता गांव गांव में जाकर तीस सितंबर तक किसानों से जनसंपर्क कर पैदल कूच में भाग लेने के लिए प्रेरित करेंगे। उन्होंने बताया कि नौ अक्टूबर को पच्चीस हजार किसानों का पैदल कूच दूदू से जयपुर के लिए रवाना होगा। इसके लिए गत 22 अगस्त को दूदू में किसानों के सामूहिक संकल्प के साथ इसकी घोषणा की गई थी। उन्होंने मांग की कि सरकार को प्रत्येक जीएसएस पर समर्थन मूल्य पर खरीद केन्द्र खोला जाना चाहिए ताकि किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए दूर जाने के लिए परेशानी के साथ भारी किराये का सामना एवं वहां रहने आदि के खर्च का सामना भी नहीं करना पड़े। उन्होंने कहा कि प्रदेश की सभी 6076 जीएसएस पर खरीद केन्द्र होने चाहिए और हमेशा खुले रहने चाहिए ताकि किसानों की उपज को बेचने में कोई भ्रष्टाचार नहीं पनपे और नहीं उसे हाथों हाथ बेचना पड़े।

उन्होंने कहा कि मूंग खरीद में औसत गुणवत्ता के नाम पर मूंगों का चयन करने में भारी भ्रष्टाचार व्याप्त रहा और किसानों में असुरक्षा का भाव आने से किसान लूट गये। महीनों कड़कड़ाती ठंड में खुले आसमान के नीचे भूख प्यासा ट्रेक्टरों पर रहना पड़ता है। उन्होंने कहा कि बहुत कम मात्रा में खरीद केन्द्र होने के कारण किसानों को फसल बेचने के लिए 150 किलोमीटर दूर तक जाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि इस बार मूंग बुवाई के साथ आंदोलन की नींव रख दी गई और दूदू एवं फागी तहसीलों के गांव गांव में किसानों की महापंचायत शुरु कर किसानों ने गत 22 अगस्त को संघर्ष का संकल्प लेकर अपनी मांगों के समर्थन में नौ अक्टूबर को जयपुर कूच करने की घोषणा कर दी गई।

उन्होंने बताया कि दूदू और फागी दोनों क्षेत्र जयपुर जिले का सर्वाधिक मूंग उत्पादक क्षेत्र है जहां जिले के कुल क्षेत्र में 75 प्रतिशत अधिक क्षेत्र में मूंग का उत्पदान होता है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2018-19 में मूंग खरीद को लेकर दिसंबर एवं जनवरी में दूदू के गिदानी खरीद केन्द्र से जयपुर के लिए मूंग से लदे ट्रेक्टरों में कूच कर मूंग मार्च किया गया। सरकार के साथ कई बार बातचीत हुई और आखिरकार सरकार को गत 23 जनवरी को विधानसभा में खरीद की घोषणा करनी पड़ी। इसे किसानों की बड़ी जीत माना गया और इसके बाद किसानों में संघर्ष के प्रति और विश्वास पैदा हो गया।

श्री जाट ने बताया कि वर्ष 2015 में किसानों ने दूदू फागी में खरीद केन्द्र खोलने के लिए निरंतर धरने प्रदर्शन किये तब जाकर दोनों तहसीलों में फसल खरीद केन्द्र आरंभ हुए। 23 दिसम्बर 2016 में दूदू से दिल्ली तक ट्रेक्टर कूच का आयोजन किया गया। कूच हरियाणा सीमा पर रोकने पर शाहजहापुर पर पड़ाव शुरु कर दिया बाद में प्रधानमंत्री स्तर की बातचीत हुई और किसानों को आश्वस्त किया गया लेकिन इसका नतीता ढांक के तीन पात जैसा रहा। इसके बाद वर्ष 2017 में तीन दिन तक किसानों ने उपवास किया। गत वर्ष अक्टूबर में अनिश्चितकालीन आमरण अनशन भी किया गया। इसके लिए सरकार ने किसानों को जगह उपलब्ध नहीं कराने पर किसानों ने अनूठे तरीके से साइकिल रिक्शा पर चिलता फिरता अनशन किया।

उन्होंने बताया कि किसानों ने 21 अक्टूबर 2010 को दूदू में राज्य स्तरीय किसान महापंचायत कर उसमें प्रत्येक ग्राम सहकारी समिति पर स्थाई खरीद केन्द्र बनाकर वर्ष न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कृषि उपजों की खरीद करने का प्रस्ताव पारित हुआ और उसकी क्रियान्विति के लिए ग्राम से लेकर प्रदेश स्तर तक किसान महापंचायत का आयोजन हुआ। राज्य के प्रत्येक विधानसभा में कम से कम पांच एवं अधिकतम सौ गांवों तक किसान महापंचायतों का क्रम चला और 13 फरवरी 2012 को जयपुर के उद्योग मैदान में राज्य स्तरीय किसान महापंचायत हुई। इस दौरान विधानसभा चलने तक तीस दिन धरना चला और किसानों ने गिरफ्तारियां दी।

इसके बाद किसानों की सुनिश्चित आय एवं मूल्य का अधिकार विधेयक 2012 का प्रारुप तैयार किया गया। जिसका न्यायविद, शिक्षाविद, आईएएस, आईपीएस, बार कौंसिल आफ इंडिया तथा बार कौंसिल आफ राजस्थान के सदस्य एवं जागरुक किसानों की कार्यशाला हुई जिसमें इसका समर्थन किया गया। इसके बाद देश के 114 किसान प्रतिनिधियों ने इस पर अपनी मोहर लगाई। इसके आधार पर निजी विधेयक को लोकसभा में आठ अगस्त 2014 को विचारार्थ स्वीकार किया। इससे पहले 13 जनवरी 2013 को जयपुर में कांग्रेस चिंतन शिविर के दौरान किसानों ने हल्ला बोल प्रदर्शन किया और अपना ज्ञापन प्रधानमंत्री तक पहुंचाकर इसे पूरा किया। किसानों ने संघर्ष के तहत राजस्थान में वृहत स्तर पर पैतालीस हजार गांवों में ग्राम बंद आंदोलन करने के साथ कई किसान सम्मेलनों का आयोजन भी किया गया।

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