हमें सांस की कीमत समझते हुये प्रभू का ध्यान करना चाहिये: संत अर्जुनराम

  • Devendra
  • 19/08/2019
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गुलाबपुरा। राम रामस्नेही संत श्री अर्जुन राम जी महाराज ने अपने चातुर्मास प्रवास के दौरान सार्वजनिक धर्मशाला गुलाबपुरा में भक्तमाल की कथा सुनाते हुए आज ठाकुर जी की प्रिय भक्त करमेती बाई का चरित्र चित्रण करते हुए बताया कि राजस्थान में सीकर के पास खंडेला ग्राम में ब्राह्मण कुल में परसराम की बेटी के रूप में जन्म लेने वाली करमेती बाई ने बचपन में भक्ति करके परमात्मा को प्राप्त कर लिया तथा बाल्यावस्था में ही घर त्याग कर वृंदावन में ब्रह्मकुंड पर साधना करने चली गई तथा संसार के साधनों को त्याग दिया। महाराज ने कथा को आगे बढ़ाते हुए बताया कि करमेती बाई ने मानसिक सेवा द्वारा भगवान की भक्ति कर ठाकुर जी के दर्शन किये।

महाराज ने बताया कि भीतर में अगर भगवान दिख जाए तो बाहर का आनंद फीका लगने लगता है। मनुष्य शरीर कचरा उत्पन्न करने की फैक्ट्री है इसमें अनुपयोगी वस्तु उत्पन्न होती है। इस तन को पाकर प्रभु को प्राप्त कर सकते हैं। पुण्य का फल सुख व पाप का फल दुख होता है। मनुष्य शरीर भगवान की करुणा से प्राप्त होता है, मनुष्य शरीर के अतिरिक्त चौरासी लारव योनियां भगवान के पास पड़ीहैं, जिसमें सबसे उत्तम शरीर मानव शरीर ही है। 14 बार इंद्र को भी मकोड़ा के शरीर में पृथ्वी पर आना पड़ा। भगवान की भक्ति करके मनुष्य 84 जन्मों से छुटकारा प्राप्त कर सकता हैं। शरीर छोड़ने से कल्याण नहीं होता है, आत्महत्या इसका समाधान नहीं है अपने मन को जगाना चाहिए। जगत का सुख नश्वर है भगवान से मिला सुख शाश्वत सुख है। यह संसार दुखालय है, हर क्रिया एक के लिए सुख है तो दूसरे के लिए दुख होती है। मनुष्य के सांसों की डोरी को दिन व रात रूपी दो चूहे हर दम काटते रहते हैं। इसलिए हमें हर सांस की कीमत को समझते हुये प्रभू का ध्यान करना चाहिये।

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